एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को धूमधाम से आयोजित हुआ। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. योगेंद्र नारायण की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।
शिक्षा सत्र 2022-24 और 2023-25 के कुल 6806 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में शामिल होने के लिए 649 छात्रों ने पंजीकरण कराया, जिनमें 472 स्नातकोत्तर (पीजी) और 177 पीएचडी के छात्र-छात्राएं शामिल रहे। इस दौरान 79 मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलाधिपति डॉ. योगेंद्र नारायण ने कहा कि छात्र-छात्राओं को अतीत की प्रज्ञा का अध्ययन करते हुए आधुनिक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से नवाचार एवं विकास के लिए प्रयास करना चाहिए और स्वयं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रखना चाहिए।
कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत है। डिग्री केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि विद्यार्थी की वास्तविक ताकत होती है।
समारोह का संचालन कर रहे डॉ. विश्वेश वाग्मी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संदेश पढ़ा, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों से देश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल निजी हितों तक सीमित न रखें, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के ग्रामीण एवं अभियंत्रिकी विभाग की शोध पत्रिका ‘माउंटेन रिसर्च’ के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। कुलपति, कुलाधिपति और अन्य अतिथियों ने विभाग को इस उपलब्धि पर बधाई दी।
दीक्षांत समारोह में इस बार पहाड़ी संस्कृति की विशेष झलक देखने को मिली। पारंपरिक गाउन की जगह विद्यार्थियों को पहाड़ी वेशभूषा में डिग्री प्रदान की गई। छात्र-छात्राएं पहाड़ी टोपी और रंग-बिरंगे पटकों में नजर आए।
समारोह में संस्कृत विषय की छात्रा ज्योति (सत्र 2022-24) और छात्र मनीष शिवांशु (सत्र 2023-25) को पांच-पांच गोल्ड मेडल प्रदान किए गए। दोनों ने अपने विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।



