इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: तीन बार फेल डीएलएड अभ्यर्थियों को अतिरिक्त मौका नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के उन अभ्यर्थियों को बड़ा झटका दिया है, जो एक ही विषय में तीन बार असफल होने के बाद चौथे अवसर (अतिरिक्त मौका) की मांग कर रहे थे। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि मासूम बच्चों का भविष्य कमजोर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों के हवाले नहीं किया जा सकता। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना राज्य का संवैधानिक दायित्व है और नियमों के विरुद्ध अतिरिक्त अवसर देना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील स्वीकार करते हुए एकल पीठ का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें तीन बार असफल प्रशिक्षुओं को अतिरिक्त मौका देने का निर्देश दिया गया था।
नियम क्या कहते हैं
डीएलएड कोर्स के नियमों के अनुसार यदि कोई प्रशिक्षु किसी एक विषय में तीन बार अनुत्तीर्ण होता है, तो उसका प्रशिक्षण समाप्त माना जाता है। हालांकि, परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव ने वर्ष 2021 और 2022 में कुछ अभ्यर्थियों को विशेष अनुमति देकर परीक्षा में बैठने का मौका दिया था। इसके बाद सैकड़ों अन्य अभ्यर्थियों ने समानता के आधार पर अतिरिक्त अवसर की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसे एकल पीठ ने स्वीकार कर लिया था।
सरकार की दलील
राज्य सरकार ने खंडपीठ के समक्ष दलील दी कि अभ्यर्थियों को पहले ही पर्याप्त अवसर दिए जा चुके हैं और परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव के पास नियमों को शिथिल करने की कोई वैधानिक शक्ति नहीं है। केंद्र और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा निर्धारित नियमों को किसी सरकारी आदेश से बदला नहीं जा सकता।
अदालत की स्पष्ट टिप्पणी
खंडपीठ ने कहा कि यदि पहले कुछ अभ्यर्थियों को नियमों के विरुद्ध लाभ दिया गया, तो अन्य अभ्यर्थी भी उसी अवैध लाभ की मांग नहीं कर सकते। समानता का अधिकार केवल वैध और कानूनी कार्यों पर लागू होता है, अवैध निर्णयों को दोहराने के लिए नहीं।
एनसीटीई नियम सर्वोपरि
अदालत ने दोहराया कि एनसीटीई के नियम सर्वोपरि हैं। दो वर्ष का डीएलएड कोर्स अधिकतम तीन वर्ष में पूरा करना अनिवार्य है और समय सीमा बढ़ाने या अतिरिक्त मौका देने का अधिकार परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव को नहीं है।
इस फैसले के साथ ही तीन बार असफल हो चुके अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर देने की मांग पर कानूनी विराम लग गया है।


