March 10, 2026 - 11:44 pm

पश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर असर: तेल-गैस से लेकर रेमिटेंस तक कई सेक्टर प्रभावित, सरकार ने उठाए आपात कदम

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पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्र में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। 4 मार्च को संघर्ष ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब अमेरिकी सबमरीन ने हिंद महासागर में ईरान के एक युद्धपोत को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। इस घटना के बाद संघर्ष का दायरा दक्षिण एशिया तक पहुंच गया, जिससे भारत भी सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है।

स्थिति को देखते हुए भारतीय नौसेना को भी इस मामले पर बयान जारी करना पड़ा। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष का भारत पर किन-किन क्षेत्रों में असर पड़ रहा है और भारत सरकार इससे निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है।

क्यों पड़ रहा भारत पर असर

अमेरिका और इस्राइल के हमलों के बाद ईरान ने भी पलटवार किया। ईरान ने इस्राइल के साथ-साथ पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देश शामिल हैं।

हमलों के दौरान मिसाइलों और ड्रोन के जरिए तेल रिफाइनरियों, गैस उत्पादन संयंत्रों और समुद्र में चलने वाले तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचाया गया। इसके कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और भारत समेत एशिया व यूरोप के कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।

कतर और सऊदी अरब जैसे देशों ने अपने तेल और गैस भंडारों पर हमले के कारण उत्पादन प्रभावित होने का हवाला देते हुए भारत को फोर्स मैज्योर का नोटिस भी जारी किया है, जिसके तहत गैस आपूर्ति समझौते को अस्थायी रूप से रोकने की बात कही गई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का असर

ईरान ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन का प्रमुख समुद्री मार्ग है। इसके चलते इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही रुक गई है।

भारत अपनी जरूरत का करीब 50 प्रतिशत कच्चा तेल इसी जलमार्ग से आयात करता है। इसलिए इसके बंद होने का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया में फंसे भारतीय

पश्चिम एशिया के देशों में बड़ी संख्या में भारतीय पढ़ाई, रोजगार और व्यापार के लिए रहते हैं। अनुमान के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में करीब 97 लाख भारतीय बसे हुए हैं। इनमें लगभग 40 प्रतिशत संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं।

युद्ध के कारण इन भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कई एयरलाइनों ने अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। इसके कारण हजारों भारतीयों के फंसने की आशंका है।

भारत के किन-किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर
1. ऊर्जा क्षेत्र

भारत अपनी खपत का लगभग 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। इसमें से करीब आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।

इसके अलावा भारत अपनी एलपीजी की 80 से 85 प्रतिशत जरूरत और एलएनजी का बड़ा हिस्सा भी खाड़ी देशों से मंगाता है। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने पर ऊर्जा संकट गहरा सकता है।

2. निर्माण और सीमेंट उद्योग

भारत अपने कुल आयात का 68.5 प्रतिशत चूना पत्थर और 62.1 प्रतिशत जिप्सम पश्चिम एशिया से मंगाता है। आपूर्ति बाधित होने पर सीमेंट की कीमतें बढ़ सकती हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

3. स्टील उद्योग

स्टील उत्पादन के लिए जरूरी डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन का लगभग 59 प्रतिशत आयात पश्चिम एशिया से होता है। इसके अलावा स्टील प्लांट ऊर्जा जरूरतों के लिए एलपीजी और एलएनजी पर निर्भर हैं। ऐसे में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव से इस क्षेत्र पर दबाव बढ़ सकता है।

4. उर्वरक उद्योग

भारत अपने आयातित सल्फर का लगभग 65.8 प्रतिशत पश्चिम एशिया से मंगाता है, जो उर्वरक उत्पादन के लिए जरूरी है। एलएनजी की कमी होने पर यूरिया उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।

5. ऊर्जा ग्रिड और अक्षय ऊर्जा

पावर ग्रिड और अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले तांबे के तार का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा भारत पश्चिम एशिया से आयात करता है। आपूर्ति बाधित होने पर ऊर्जा परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है।

6. रत्न और आभूषण उद्योग

भारत अपने कच्चे हीरों का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। सूरत जैसे शहरों में इनकी कटिंग और पॉलिशिंग होती है।

इसके अलावा भारत बड़ी मात्रा में सोना और चांदी भी पश्चिम एशिया से मंगाता है। संयुक्त अरब अमीरात से ही करीब 16 प्रतिशत सोने की आपूर्ति होती है। इसलिए इस सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है।

7. अर्थव्यवस्था और रेमिटेंस

खाड़ी देशों के संगठन जीसीसी में लगभग एक करोड़ भारतीय काम करते हैं। वर्ष 2024-25 में इन देशों से भारत को 135 अरब डॉलर का रेमिटेंस मिला था।

युद्ध की स्थिति में इन भारतीयों की नौकरियां और भारत आने वाला यह पैसा प्रभावित हो सकता है।


संकट से निपटने के लिए भारत के कदम
एलपीजी आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश

सरकार ने सभी रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन का उपयोग करके एलपीजी उत्पादन बढ़ाएं। पेट्रोकेमिकल उत्पादों में इन गैसों के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगा दी गई है, ताकि घरेलू गैस की कमी न हो।

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश

भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। इसके अलावा अमेरिका और अन्य देशों से भी तेल और एलपीजी आयात बढ़ाया जा रहा है।

सरकार सोनाट्रैक, एडीएनओसी और कई वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के साथ अतिरिक्त आपूर्ति के लिए बातचीत कर रही है।

समुद्री बीमा कवर की पहल

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले के खतरे को देखते हुए भारत ने अमेरिका से संपर्क किया है। भारत चाहता है कि अमेरिकी इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन के माध्यम से तेल ले जाने वाले जहाजों को समुद्री बीमा सुरक्षा दी जाए।

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