March 14, 2026 - 2:03 am

Jaishankar: पश्चिम एशिया संकट के बीच चौथी बार हुई जयशंकर-अराघची की बातचीत, होर्मुज से मिल रही अच्छी खबर

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच गुरुवार रात फोन पर बातचीत हुई। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है। इस दौरान द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और ब्रिक्स से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने अराघची के साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और भारत से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात की। भारत इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित कराने की कोशिश कर रहा है।

15 दिनों में चौथी बार बातचीत

बताया जा रहा है कि बीते करीब 15 दिनों में दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है। इससे पहले 5 मार्च और 10 मार्च को भी दोनों के बीच फोन पर चर्चा हुई थी। इसके अलावा 28 फरवरी को अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भी जयशंकर ने अराघची से बात की थी।

होर्मुज से आई राहत की खबर

भारत, रणनीतिक दृष्टि से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। अमेरिका और इस्राइल के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच तेहरान ने इस मार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि गुरुवार को एक राहत भरी खबर भी सामने आई, जब एक भारतीय व्यापारिक जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया। इसे भारत के कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है।

ईरान ने क्या कहा

ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अराघची ने अपने भारतीय समकक्ष को अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से पैदा हुई स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं का क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

अराघची ने यह भी कहा कि ईरान अपने आत्मरक्षा के वैध अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए दृढ़ है। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की निंदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

बयान में बहुपक्षीय सहयोग के मंच के रूप में ब्रिक्स की भूमिका का भी उल्लेख किया गया और कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में क्षेत्र और दुनिया में स्थिरता बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका हो सकती है।

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