राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित दो दिवसीय संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने जनसंख्या कानून, डेमोग्राफिक चेंज और आरक्षण व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।नींबूवाला स्थित संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जनसंख्या कानून बनाते समय आने वाले 50 वर्षों को ध्यान में रखकर योजना बनानी चाहिए। भविष्य में जनसंख्या और संसाधनों के संतुलन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने हिंदू समाज के लोगों के लिए कम से कम तीन बच्चों की पैरवी भी की।
‘बंटेंगे तो कटेंगे’ के दिन नहीं आएंगे
डेमोग्राफिक बदलाव पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश में लगातार बढ़ती आबादी को देखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ जैसे नारों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अब देश में ऐसे हालात नहीं आएंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से संघ से जुड़ने और शाखाओं में आने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे संगठन को लेकर फैली भ्रांतियां भी दूर होंगी। तकनीक के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसे जीवन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने युवाओं, खासकर जेन जी, के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें भारतीय संस्कृति व परंपराओं से जोड़ने पर जोर दिया।
आरक्षण व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि समय के साथ लोगों की समझ बदलेगी और संभव है कि भविष्य में संपन्न वर्ग के लोग स्वयं आरक्षण का लाभ लेने से इंकार करें। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण में सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।


