पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए कृषि विभाग ने काशीपुर और जसपुर क्षेत्र में कार्बन क्रेडिट योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 5000 एकड़ भूमि को कार्बन क्रेडिट में बदलने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए अब तक करीब 1500 किसान आवेदन कर चुके हैं।
योजना के अंतर्गत किसान खेतों में हरियाली बढ़ाकर और मिट्टी की सेहत सुधारकर कार्बन को अवशोषित करेंगे। इस अवशोषित कार्बन को कार्बन क्रेडिट में परिवर्तित किया जाएगा, जिसे अंतरराष्ट्रीय कंपनियां खरीदती हैं। इसके बदले किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
कार्बन डेवलपर्स संस्था वरहा क्लाइमेट एजी के राज्य प्रभारी धीरज भट्ट के अनुसार, उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने से किसान प्रति हेक्टेयर सालाना 0.5 से 10 टन तक कार्बन उत्सर्जन कम कर सकते हैं। वर्तमान वैश्विक बाजार दरों के आधार पर किसानों को प्रति हेक्टेयर सालाना 7 हजार से 24 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय होने की संभावना है, जो उनकी मुख्य फसल की आय से अलग होगी।
गांव-गांव में जागरूकता अभियान
कृषि विभाग और वरहा क्लाइमेट एजी संस्था मिलकर किसानों को योजना से जोड़ने के लिए गांवों में लगातार कार्यशालाएं आयोजित कर रहे हैं। इन कार्यशालाओं में किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों और कार्बन क्रेडिट के लाभों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
ऐसे मिलता है कार्बन क्रेडिट
योजना में आवेदन करने के बाद किसानों की भूमि का सर्वे किया जाता है और फसल चक्र का आकलन होता है। किसानों को पराली जलाने से बचना होगा। एक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी पर एक कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक कार्बन क्रेडिट की कीमत 15 से 20 डॉलर तक है। एक हेक्टेयर भूमि से 5 से 8 कार्बन क्रेडिट प्राप्त हो सकते हैं। योजना के तहत 2 से 3 वर्षों तक निगरानी भी की जाती है।
बदलनी होगी खेती की कार्यशैली
कार्बन क्रेडिट योजना से जुड़ने के लिए किसानों को पारंपरिक खेती के तरीकों में बदलाव करना होगा। पराली जलाने के बजाय अवशेषों को जमीन में मिलाना, ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाना, रासायनिक खादों की जगह जैविक खाद का उपयोग करना, मिश्रित खेती को बढ़ावा देना और खेत की मेड़ों पर वृक्षारोपण करना आवश्यक होगा। साथ ही कम जुताई वाली खेती को अपनाना भी जरूरी है।
इस पहल से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ने से भूमि की उर्वरता में भी सुधार होगा।
खंड कृषि अधिकारी डॉ. कल्याण सिंह रावत ने बताया कि कार्बन क्रेडिट योजना किसानों और पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है। किसानों को इससे जोड़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है।



