भारतीय संसदीय इतिहास में सोमवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सदन में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित 19 सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रसिद्ध संवैधानिक वकील डॉ. मेनका गुरुस्वामी सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं।
डॉ. गुरुस्वामी ने पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद के रूप में शपथ ली। वह देश की पहली ऐसी सांसद हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से खुद को LGBTQ+ (क्वीर) समुदाय से जुड़ा बताया है। उनके राज्यसभा पहुंचने को सामाजिक और राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
कानूनी लड़ाई से संसद तक
51 वर्षीय डॉ. मेनका गुरुस्वामी ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षित हैं। वह वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 के खिलाफ ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई का अहम चेहरा रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया था।
शपथ के बाद उन्होंने कहा कि वह संविधान के समानता और भेदभाव रहित मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगी।
इन सदस्यों ने ली शपथ
शपथ लेने वालों में रामदास आठवले, माया चिंतामन इवनाते, शरदचंद्र पवार, रामराव सखाराम वडकुते, डॉ. ज्योति नागनाथ वाघमारे, क्रिस्टोफर मणिकम, डॉ. अंबुमणि रामदास, कॉन्सटेंटाइन रवींद्रन, एल.के. सुधीश, डॉ. एम. थंबीदुरई, तिरुचि शिवा, बाबुल सुप्रिया बराल, डॉ. मेनका गुरुस्वामी, राजीव कुमार, रुक्मिणी मलिक (कोयल मलिक), बिस्वजीत सिन्हा, संतृप्त मिश्रा, दिलीप कुमार रे और मनमोहन सामल शामिल हैं।
भाषाई विविधता की झलक
शपथ ग्रहण समारोह में देश की भाषाई विविधता भी देखने को मिली।
- 6 सदस्यों ने तमिल में
- 4 ने बंगाली में
- 3 ने मराठी में
- 3 ने ओडिया में
- 2 ने हिंदी में
- 1 सदस्य ने अंग्रेजी में शपथ ली
राज्यसभा में इस बार तमिलनाडु से 6, महाराष्ट्र से 5, पश्चिम बंगाल से 5 और ओडिशा से 3 सदस्य चुने गए हैं।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम, राज्यसभा के महासचिव पी.सी. मोदी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।



