डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह कार्रवाई करीब 30 लोगों, कंपनियों और जहाजों को निशाना बनाकर की गई है। अमेरिका का आरोप है कि ये सभी ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, ड्रोन निर्माण और प्रतिबंधों के बावजूद गुप्त रूप से तेल बेचने में मदद कर रहे थे।
प्रतिबंधों की घोषणा विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने की, जो अमेरिकी वित्त मंत्रालय के तहत काम करता है। कार्रवाई में उन पुराने तेल टैंकरों को भी शामिल किया गया है जिन्हें ईरान की ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। इन जहाजों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचते हुए गुपचुप तरीके से तेल बेचने के लिए किया जाता है।
प्रतिबंधों का असर क्या होगा?
नए प्रतिबंधों के तहत जिन व्यक्तियों और कंपनियों को सूचीबद्ध किया गया है, वे अमेरिका में मौजूद अपनी किसी भी संपत्ति या बैंक खाते का उपयोग नहीं कर सकेंगे। साथ ही कोई भी अमेरिकी नागरिक या कंपनी इनके साथ कारोबार नहीं कर पाएगी। हालांकि जानकारों का मानना है कि इनमें से अधिकांश के पास अमेरिका में सीमित संपत्ति है, इसलिए यह कदम काफी हद तक प्रतीकात्मक भी माना जा रहा है।
परमाणु वार्ता से पहले बढ़ा दबाव
इसी सप्ताह जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर अहम बातचीत होने वाली है। अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ईरानी अधिकारियों के बीच यह वार्ता ओमान की मध्यस्थता में होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक वार्ता से ठीक पहले लगाए गए प्रतिबंधों को ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना है कि ईरान 60 प्रतिशत तक यूरेनियम शुद्ध कर चुका है, जो हथियार बनाने के स्तर के काफी करीब है। दूसरी ओर ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर जिनेवा में होने वाली वार्ता पर टिकी है। देखना होगा कि बातचीत से तनाव कम होता है या दोनों देशों के बीच टकराव और गहराता है।


