पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध ने अब पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण मानवीय नुकसान के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर दिखने लगा है।
आइए जानते हैं कि इस युद्ध के सात दिनों में हालात किस तरह बदलते गए और अब तक कौन-सा पक्ष बढ़त में दिख रहा है।
28 फरवरी: युद्ध की शुरुआत
अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमला किया।
अमेरिका ने इस अभियान को ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और इस्राइल ने ‘रोरिंग लायन’ नाम दिया।
पहले दिन 100 से अधिक लड़ाकू विमानों और मिसाइलों से ईरान के सरकारी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। एक हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई।
इसी दिन ईरान के मीनाब शहर के एक प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल हमले में 165 बच्चियों की मौत हो गई। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के साथ दुबई के पर्यटन क्षेत्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
1 मार्च: संघर्ष हुआ और तेज
दूसरे दिन अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के नौ नौसैनिक जहाज डुबो दिए और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के मुख्यालय को भारी नुकसान पहुंचाया।
इसके जवाब में ईरान ने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला किया, जिसमें छह अमेरिकी सैनिक मारे गए।
इसी दिन इस्राइल के बेत शेमेश शहर पर ईरानी मिसाइल गिरने से नौ लोगों की मौत हुई।
2 मार्च: युद्ध लेबनान तक पहुंचा
लेबनान से हिजबुल्ला ने इस्राइल पर मिसाइलें दागीं, जिससे युद्ध का दायरा बढ़ गया। इसके जवाब में इस्राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हवाई हमले किए, जिनमें 31 लोग मारे गए।
उधर ईरान ने सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया। इसी दिन कुवैत में एक कथित फ्रेंडली फायर की घटना में अमेरिका के तीन एफ-15 विमान गिर गए।
3 मार्च: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद
अमेरिका ने बंकर नष्ट करने वाले हथियारों से लैस बी-2 बॉम्बर तैनात किए।
रणनीतिक जवाब देते हुए ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण अहम मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को बंद कर दिया।
इसके साथ ही रियाद, दुबई और कुवैत में ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिशें हुईं, जिनमें से कई को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
4 मार्च: हिंद महासागर में बड़ा हमला
अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस देना को टॉरपीडो से डुबो दिया।
यह जहाज श्रीलंका के गॉल के पास था और इसमें 87 ईरानी नाविक मारे गए। बचाव अभियान में Indian Navy ने भी मदद की।
5 मार्च: पहली हवाई भिड़ंत
युद्ध में पहली बार हवाई लड़ाई देखने को मिली।
इस्राइल ने दावा किया कि उसके इस्राइली एफ-35 लड़ाकू विमान ने तेहरान के ऊपर एक ईरानी सुखोई-35 विमान को मार गिराया। जवाब में ईरान ने फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया।
6 मार्च: हमलों का सिलसिला जारी
पूरे पश्चिम एशिया में मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे।
इस्राइल ने ईरान और लेबनान में हमलों की नई लहर शुरू करने की घोषणा की, जबकि ईरान ने तेल अवीव पर लगातार मिसाइल और ड्रोन दागे।
एक हफ्ते में कितना नुकसान?
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक
- ईरान में: 1,332 से अधिक मौतें
- लेबनान में: 200 से ज्यादा
- इस्राइल में: 11
- अमेरिकी सैनिक: 6
लगभग 3.3 लाख लोग पूरे पश्चिम एशिया में विस्थापित हो चुके हैं।
वैश्विक असर
- 11,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द
- कच्चे तेल की कीमत 10% बढ़कर करीब 91 डॉलर
- गैस और ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल
- क्या किसी पक्ष को बढ़त?
- इस संघर्ष में अभी तक कोई स्पष्ट विजेता नहीं है।
- इस्राइल का दावा है कि उसने ईरान की 80% हवाई रक्षा प्रणाली नष्ट कर दी है और उसे हवाई बढ़त मिल गई है।
- वहीं ईरान कम लागत वाले शाहेद-136 ड्रोन और मिसाइलों के जरिए बड़े पैमाने पर जवाबी हमले कर रहा है, जिससे अमेरिका और इस्राइल की लागत लगातार बढ़ रही है।
- कितने दिन चल सकता है युद्ध?
- अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले कहा था कि यह युद्ध दो-तीन दिनों में खत्म हो सकता है, लेकिन बाद में उन्होंने माना कि यह संघर्ष चार सप्ताह तक चल सकता है।
- व्हाइट हाउस का अनुमान है कि सैन्य अभियान चार से छह सप्ताह तक जारी रह सकता है, जबकि पेंटागन ने इसकी कोई निश्चित समयसीमा बताने से इनकार किया है।


