नई दिल्ली। भारत सरकार ने सोमवार को उन मीडिया रिपोर्ट्स का सिरे से खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ट्रांजिट लेवी को लेकर भारत और ईरान के बीच बातचीत चल रही है। सरकार ने इन खबरों को पूरी तरह आधारहीन बताया है।
नौवहन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने स्पष्ट किया कि ट्रांजिट लेवी को लेकर ईरान के साथ किसी तरह की बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन ऐसे किसी घटनाक्रम की जानकारी नहीं है।
मंगल ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद 16 भारतीय व्यापारिक जहाजों की लगातार निगरानी की जा रही है। वहीं, एलपीजी से लदे दो जहाज ‘ग्रीन संघवी’ (46,500 टन) और ‘ग्रीन आशा’ (15,500 टन) सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर चुके हैं। इनके क्रमशः 7 और 9 अप्रैल तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
एलपीजी आपूर्ति पर हल्का असर, सरकार सतर्क
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि एलपीजी आयात में हल्की गिरावट आई है और घरेलू उत्पादन भी सीमित है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि मांग को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार ने आपूर्ति सुचारू रखने के लिए अमेरिका सहित अन्य देशों से आयात जारी रखा है। उर्वरक संयंत्रों को गैस आपूर्ति 90 प्रतिशत तक बढ़ाई गई है, जबकि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स को 10 प्रतिशत अतिरिक्त गैस आवंटित की जा रही है।
पश्चिम एशिया संकट का असर, 7.3 लाख भारतीय लौटे
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर. महाजन ने बताया कि क्षेत्र में जारी तनाव के कारण 28 फरवरी से अब तक करीब 7.3 लाख भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए कतर एयरवेज सोमवार को भारत के लिए 8 से 10 उड़ानों का संचालन कर रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षित वापसी को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।



