रुद्रपुर। शहर में बढ़ता यातायात दबाव और ई-रिक्शा-टेंपो चालकों की मनमानी अब आम जनता के साथ पुलिस-प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है। तय रूट और नियमों को दरकिनार कर चालक मनमाने तरीके से सड़कों पर वाहन दौड़ा रहे हैं। सख्ती के बावजूद व्यवस्था में सुधार न होने से शहर की यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।
मुख्य चौराहों और प्रमुख मार्गों पर दिन-रात ई-रिक्शा और टेंपो की भरमार रहती है। अधिक सवारी के लालच में चालक वाहन सड़क और हाईवे के बीचोंबीच खड़े कर देते हैं, जिससे अन्य वाहनों की आवाजाही बाधित होती है। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है, जब ई-रिक्शा चालक निर्धारित रूट छोड़कर मनमाने रास्तों पर चलने लगते हैं। इसी दौरान भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
किशोर चला रहे ई-रिक्शा, बढ़ा जोखिम
ट्रांजिट कैंप रूट पर बड़ी संख्या में नाबालिग या किशोर ई-रिक्शा चलाते नजर आ रहे हैं। बिना रजिस्ट्रेशन और प्रशिक्षण के ये चालक मुख्य सड़कों पर अचानक यू-टर्न ले लेते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहन उनसे टकरा जाते हैं। हैरानी की बात है कि ऐसे चालक पुलिस की नजर से दूर हैं।
नियमों की अनदेखी, रूट व्यवस्था बेअसर
शहर में ई-रिक्शा संचालन के लिए चार रूट और उनकी कलर पट्टी तय की गई है, लेकिन इनका पालन नहीं हो रहा है—
- लाल पट्टी (रूट-1): डीडी चौक से खेड़ा, फुलसुंगी, तीनपानी, ट्रांजिट कैंप
- नीली पट्टी (रूट-2): अग्रसेन चौक से इंदिरा कॉलोनी, सिंह कॉलोनी, मलिक कॉलोनी, शांति विहार
- हरी पट्टी (रूट-3): अग्रसेन चौक व गाबा चौक से रेलवे स्टेशन
- पीली पट्टी (रूट-4): अग्रसेन चौक से बाटा चौक, विशाल मार्ट होते हुए आवास विकास
इसके बावजूद चालक अपनी सुविधा के अनुसार रूट बदलकर वाहन चला रहे हैं।
अभियान चलाने की जरूरत
लगातार बढ़ती अव्यवस्था और हादसों को देखते हुए पुलिस-प्रशासन के लिए जरूरी हो गया है कि सख्त अभियान चलाकर नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही बिना रजिस्ट्रेशन और नाबालिग चालकों पर कार्रवाई कर यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाया जाए।



