धामी सरकार ने राज्य में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए इस बार जेंडर बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जेंडर बजट का प्रावधान बढ़ाकर 19,692.02 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 16,961.32 करोड़ रुपये था। सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आजीविका से जुड़ी कई योजनाओं के लिए बजट में अलग-अलग प्रावधान किए हैं।
नारी सशक्तीकरण के लिए कई योजनाओं में प्रावधान
सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए कई योजनाओं में धनराशि आवंटित की है। इनमें प्रमुख रूप से—
- नंदा गौरा योजना के तहत 220 करोड़ रुपये
- प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 47.78 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री बाल पोषण योजना के लिए 25 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट योजना के लिए 30 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना के लिए 13.44 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना के लिए 15 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री बाल एवं महिला बहुमुखी विकास निधि के लिए 8 करोड़ रुपये
- निराश्रित विधवाओं की पुत्रियों के विवाह के लिए 5 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक मेधावी बालिका प्रोत्साहन योजना के लिए 3.76 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना के लिए 5 करोड़ रुपये
- ईजा-बोई शगुन योजना के तहत प्रसूताओं के लिए 122 करोड़ रुपये
- मुख्यमंत्री महिला सतत आजीविका योजना के लिए 2 करोड़ रुपये
- महिला स्पोर्ट्स कॉलेज, चंपावत के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये
- गंगा गाय महिला डेरी विकास योजना के लिए 5 करोड़ रुपये
हर साल बढ़ रहा जेंडर बजट
प्रदेश में जेंडर बजट का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2021-22 में यह कुल बजट का लगभग 12 प्रतिशत था, जिसे 2022-23 में बढ़ाकर 13.77 प्रतिशत किया गया। इसके बाद 2023-24 में यह करीब 14 प्रतिशत और 2024-25 में 16 प्रतिशत तक पहुंच गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 1,01,175 करोड़ रुपये के बजट में जेंडर बजट की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत रखी गई है।
सरकार का फोकस महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने, उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग को मजबूत करने पर है। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने भविष्य में बजट का 30 प्रतिशत हिस्सा महिला सशक्तीकरण के लिए निर्धारित करने की भी पैरवी की है।



