नई दिल्ली/गाजियाबाद। 12 साल से कोमा की स्थिति में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे 31 वर्षीय युवक को सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी है। कोर्ट के आदेश के बाद उसकी कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली को हटाया जाएगा।
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज अंपायर निवासी हरीश राणा वर्ष 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे। हादसे में उनके सिर और कमर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद वह क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित हो गए और पूरी तरह निष्क्रिय अवस्था में चले गए। पिछले 12 वर्षों से उनका इलाज चल रहा था, लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ।
हरीश के माता-पिता ने बेटे की हालत को देखते हुए अदालत से इच्छामृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई थी। बीते वर्ष 8 जुलाई को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां बुधवार को इस मामले में अहम फैसला सुनाया गया।
गरिमा के साथ उपचार बंद करने के निर्देश
न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने एम्स, दिल्ली को निर्देश दिया कि हरीश को उपशामक देखभाल इकाई में भर्ती किया जाए, ताकि तय प्रक्रिया के तहत उपचार बंद किया जा सके। अदालत ने कहा कि पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से हो और मरीज की गरिमा बनी रहे।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के डॉक्टरों के द्वितीयक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का भी अध्ययन किया। अदालत ने रिपोर्ट को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि मरीज की हालत दयनीय है और उसके ठीक होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर है।
मेडिकल बोर्ड ने जताई थी ठीक होने की नगण्य संभावना
प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मरीज के स्वस्थ होने की संभावना बेहद कम है। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में जारी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि कोमा में पड़े मरीज के मामले में जीवन रक्षक प्रणाली हटाने से पहले प्राथमिक और द्वितीयक मेडिकल बोर्ड की राय आवश्यक होती है।
इलाज में बिक गया तीन मंजिला मकान
हरीश के पिता अशोक राणा के अनुसार, दुर्घटना रक्षाबंधन के दिन हुई थी। बेटे का इलाज पीजीआई चंडीगढ़, एम्स, आरएमएल, एलएनजेपी और अपोलो समेत कई अस्पतालों में कराया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।
उन्होंने बताया कि बेटे के इलाज में दिल्ली के महावीर एंक्लेव स्थित उनका तीन मंजिला मकान भी सितंबर 2021 में बेचना पड़ा। अब आर्थिक स्थिति भी इलाज जारी रखने की अनुमति नहीं देती। उन्होंने कहा कि बेटे के लिए मौत मांगना आसान नहीं था, लेकिन हर दिन उसे इस हालत में देखना और भी पीड़ादायक है।
अंगदान की भी जताई इच्छा
अशोक राणा ने कहा कि यदि संभव हो तो बेटे के जो अंग काम कर रहे हैं, उन्हें दान कर दूसरों को नया जीवन दिया जाए।
क्या होती है निष्क्रिय इच्छामृत्यु
निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) में मरीज को कृत्रिम जीवन रक्षक उपकरणों या जीवन बनाए रखने वाले उपचार को रोककर या हटाकर प्राकृतिक मृत्यु होने दी जाती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार हरीश को लंबे समय से बेडसोर और गंभीर शारीरिक पीड़ा है और उनके स्वस्थ होने की संभावना नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की, “हमें कुछ करना होगा, उन्हें इस हालत में जीने नहीं दिया जा सकता।”



