नई दिल्ली/तेल अवीव। इस्राइल के मध्य-पश्चिम भारत में महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच ने सोमवार को कहा कि उनका देश भारत के साथ द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और व्यापक बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत इस्राइल अपनी उन्नत रक्षा तकनीक साझा करेगा और भारत में सैन्य हार्डवेयर के निर्माण को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सहयोग नवीनतम रक्षा प्रणालियों तक विस्तारित होगा और दोनों देश संयुक्त रूप से उत्पादन व तकनीकी साझेदारी को मजबूत करेंगे।
पीएम मोदी की यात्रा से बढ़ेगा सहयोग
रेवाच ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले से ही मजबूत और विशिष्ट है, क्योंकि दोनों ही कई तरह की सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित इस्राइल यात्रा के दौरान रक्षा समझौते के विस्तार से जुड़े कुछ विशेष मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। महावाणिज्यदूत के अनुसार, भारत में रक्षा विनिर्माण और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ इस्राइल की उन्नत रक्षा प्रणालियों से संबंधित सहयोग भी बढ़ाया जाएगा।
पश्चिम एशिया में नए गठबंधन की पहल
रेवाच ने कहा कि कट्टरपंथ से निपटने के लिए इस्राइल एक व्यापक क्षेत्रीय गठबंधन बनाने का इच्छुक है। इसमें अब्राहम समझौते से जुड़े देश, कुछ अफ्रीकी राष्ट्र, साइप्रस और ग्रीस सहित पश्चिम एशिया के कई देश शामिल हो सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा इस पहल को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
क्या है आयरन डोम रक्षा प्रणाली
इस्राइल की बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में आयरन डोम प्रमुख भूमिका निभाता है। यह रडार की मदद से आने वाले रॉकेट की पहचान करता है और कंप्यूटर प्रणाली तय करती है कि वह आबादी वाले क्षेत्र में गिरेगा या नहीं। खतरा होने पर इंटरसेप्टर मिसाइल दागकर उसे हवा में ही नष्ट कर दिया जाता है। हमास द्वारा गाजा से दागे गए हजारों रॉकेट को इस प्रणाली ने कई बार सफलतापूर्वक रोकने का दावा किया गया है। हालांकि यह प्रणाली मुख्य रूप से कम दूरी के रॉकेट और तोपों के हमलों को रोकने के लिए बनाई गई है। लंबी दूरी की तेज रफ्तार मिसाइलें, ड्रोन या विमान कई बार इसके दायरे से बाहर रह सकते हैं। अत्यधिक और लगातार हमलों की स्थिति में इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी भी चुनौती बन सकती है।


