डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता “उम्मीद के अनुसार नहीं चल रही” और वे इससे संतुष्ट नहीं हैं। ट्रंप का कहना है कि ईरान अमेरिका की मांगों के अनुरूप कदम उठाने को तैयार नहीं है, इसलिए अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।
जिनेवा में बातचीत बेनतीजा
गुरुवार को जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर एक और दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई बड़ा नतीजा नहीं निकला। अब तकनीकी स्तर की अगली चर्चा विएना में प्रस्तावित है।
अमेरिका का रुख सख्त बना हुआ है। ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बड़ा समझौता नहीं करता, तो सैन्य कार्रवाई भी की जा सकती है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि वह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन कर रहा है और परमाणु हथियार बनाने का उसका कोई इरादा नहीं है।
‘जरूरत पड़ी तो सैन्य विकल्प’
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन यदि बातचीत सही दिशा में नहीं बढ़ती तो सैन्य विकल्प से भी इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वे दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना रखते हैं, हालांकि उनकी प्राथमिकता युद्ध नहीं बल्कि समझौता है।
युद्ध के जोखिम से इनकार नहीं
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान पर हमला व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, तो ट्रंप ने कहा कि “जोखिम हमेशा रहता है”, लेकिन बेहतर यही होगा कि दोनों पक्ष ईमानदारी से बातचीत करें।
क्यूबा पर भी टिप्पणी
ट्रंप ने क्यूबा की आर्थिक स्थिति को कमजोर बताते हुए कहा कि वहां की सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने इसे “दोस्ताना तरीके से नियंत्रण बदलने” की संभावना वाला संवाद बताया।
इस्राइल की सक्रिय भूमिका
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू लंबे समय से ईरान के खिलाफ सख्त रुख की वकालत करते रहे हैं। उनका कहना है कि यदि ईरान हमला करता है तो इस्राइल जवाब देगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले सप्ताह इस्राइल दौरे पर जाएंगे, जिसे क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य जमावड़ा
क्षेत्र में तनाव के बीच अमेरिका ने अपने युद्धपोत और एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किए हैं। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा।
इसी बीच International Atomic Energy Agency से जुड़ी एक गोपनीय रिपोर्ट में कहा गया है कि हालिया बम हमलों के बाद ईरान ने कुछ संवेदनशील परमाणु ठिकानों पर निरीक्षकों की पहुंच सीमित कर दी है, जिससे उसके यूरेनियम संवर्धन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही।
कूटनीतिक समाधान की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से सैन्य रास्ते से बचते हुए कूटनीतिक बातचीत को प्राथमिकता देने की अपील की है। क्षेत्र में बढ़ते सैन्य जमावड़े और सख्त बयानों के बीच वैश्विक समुदाय की नजर अब आने वाली वार्ताओं और संभावित फैसलों पर टिकी है।


