नेपाल में गुरुवार (5 मार्च) को होने वाले आम चुनाव को लेकर सियासी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। सितंबर 2025 में जेन जेड के नेतृत्व में हुए बड़े प्रदर्शनों के बाद यह देश का पहला बड़ा चुनाव है, इसलिए इसे नेपाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। एक ओर जहां नई राजनीतिक ताकतें युवाओं के समर्थन के दम पर बदलाव का दावा कर रही हैं, वहीं पारंपरिक दल अपनी साख और राष्ट्रीय दर्जा बचाने की चुनौती से जूझ रहे हैं।
इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए चार बड़े चेहरे मैदान में हैं। हालांकि विभिन्न सर्वे एजेंसियों का मानना है कि असली मुकाबला युवा नेता बालेन्द्र शाह और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के बीच देखने को मिल सकता है।
बालेन्द्र शाह (बालेन): युवाओं की नई उम्मीद
35 वर्षीय बालेन्द्र शाह, जिन्हें बालेन के नाम से जाना जाता है, नेपाल की राजनीति में उभरते हुए युवा चेहरे हैं। 1990 में काठमांडू में जन्मे बालेन पेशे से सिविल इंजीनियर हैं। राजनीति में आने से पहले वह अंडरग्राउंड हिप-हॉप कलाकार के रूप में भी जाने जाते थे। उनके गीतों में भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता के खिलाफ तीखा विरोध देखने को मिलता था, जिससे युवाओं के बीच उनकी मजबूत पहचान बनी।
2022 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था। मेयर के तौर पर उन्होंने टैक्स चोरी, ट्रैफिक जाम और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सख्त फैसले लेकर एक सुधारवादी नेता की छवि बनाई। सितंबर 2025 के युवा प्रदर्शनों का समर्थन करने के बाद दिसंबर 2025 में वह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हो गए। इस चुनाव में वह झापा-5 सीट से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को चुनौती दे रहे हैं।
केपी शर्मा ओली: अनुभव और विवाद दोनों साथ
74 वर्षीय केपी शर्मा ओली नेपाल की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के प्रमुख नेता हैं और चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। किशोरावस्था में ही वह कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़ गए थे और 1973 में राजशाही विरोधी गतिविधियों के कारण गिरफ्तार भी हुए थे। उन्होंने लगभग 14 साल जेल में बिताए, जिनमें चार साल एकांतवास में रहे।
करीब छह दशक लंबे राजनीतिक जीवन में ओली एक मजबूत और राष्ट्रवादी नेता के रूप में जाने जाते हैं। हालांकि उनके आलोचक उन्हें सत्तावादी भी बताते हैं। सितंबर 2025 के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और 77 लोगों की मौत के लिए विपक्ष ने उन्हें जिम्मेदार ठहराया था, जिसके बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी। अब वह फिर से सत्ता में वापसी की उम्मीद के साथ चुनाव मैदान में हैं।
गगन थापा: कांग्रेस का नया चेहरा
49 वर्षीय गगन थापा नेपाली कांग्रेस के प्रमुख नेता हैं और पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। 1990 में राजशाही के खिलाफ चले लोकतांत्रिक आंदोलन के दौरान ही उनका झुकाव राजनीति की ओर हुआ। छात्र राजनीति से अपने सियासी सफर की शुरुआत करने वाले थापा 2006 के जनआंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे, जिसने राजशाही के अंत का रास्ता तैयार किया।
विरोध प्रदर्शनों के कारण वह कई बार जेल भी गए। बाद में संसद में पहुंचने पर वह सबसे युवा सांसदों में शामिल थे और स्वास्थ्य मंत्री भी रह चुके हैं। जनवरी 2026 में उन्होंने शेर बहादुर देउबा के खिलाफ पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मुहिम चलाई और कांग्रेस के प्रमुख बने।
पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’: माओवादी आंदोलन से मुख्यधारा तक
71 वर्षीय पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ नेपाल के पूर्व माओवादी नेता और तीन बार के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने 1996 से 2006 तक चले माओवादी विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिसके बाद मुख्यधारा की राजनीति में आए। 2008 से लेकर 2017 के बीच वह तीन बार प्रधानमंत्री बने।
हालांकि लंबे राजनीतिक अनुभव के बावजूद हाल के वर्षों में उनकी लोकप्रियता में गिरावट देखी गई है। इसके बावजूद वह इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
पर्दे के पीछे भी सक्रिय बड़े नेता
इन चार प्रमुख चेहरों के अलावा नेपाल की राजनीति में कई अनुभवी नेता पर्दे के पीछे से भी प्रभाव बनाए हुए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा इस बार चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक भूमिका अभी भी अहम मानी जा रही है। वहीं एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराय ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है और चुनाव के बाद किसी संवैधानिक पद, संभवतः राष्ट्रपति, की भूमिका निभाने की इच्छा जताई है।
नेपाल का यह चुनाव सिर्फ सरकार बनाने की कवायद नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि देश की राजनीति पर युवाओं के उभार का कितना असर पड़ता है और पारंपरिक दल इस चुनौती का किस तरह सामना करते हैं।


