दुनियाभर में प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आंकड़ों के अनुसार हर छह में से एक व्यक्ति किसी न किसी तरह की प्रजनन समस्या से प्रभावित है। पिछले एक-दो दशकों में यह समस्या काफी तेजी से बढ़ी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में प्रजनन स्वास्थ्य का विषय आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। देर से शादी और प्रेग्नेंसी की योजना, बढ़ता पर्यावरण प्रदूषण और बदलती लाइफस्टाइल महिलाओं की प्रजनन क्षमता और अंडों की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।
हमारी रोजमर्रा की कई आदतें भी प्रजनन समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिनके बारे में महिलाओं को जानकारी होना जरूरी है। महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।
आज के समय में महिलाओं में फर्टिलिटी यानी गर्भधारण करने की क्षमता कम होना एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। पहले यह समस्या अधिक उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब 20 से 30 वर्ष की उम्र में भी कई महिलाओं को गर्भधारण में कठिनाई हो रही है। अध्ययनों के अनुसार दुनिया भर में लगभग 12 से 18 प्रतिशत प्रजनन आयु की महिलाएं किसी न किसी स्तर की बांझपन (इंफर्टिलिटी) की समस्या से जूझ रही हैं।
महिला दिवस के इस अवसर पर जानिए कि महिलाओं की कौन-सी आदतें उनकी फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
फर्टिलिटी किन कारकों पर निर्भर करती है
महिलाओं की प्रजनन क्षमता शरीर की कई स्थितियों पर निर्भर करती है। इनमें हार्मोन का संतुलन, अंडाशय की सेहत, ओवुलेशन की प्रक्रिया और पोषण प्रमुख हैं। यदि इन प्रणालियों में किसी तरह की गड़बड़ी हो जाए तो गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। कई मामलों में यह समस्या रोजमर्रा की गलत आदतों से भी जुड़ी होती है, जिन्हें समय रहते बदलकर काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

किन आदतों में सुधार जरूरी
समय पर परिवार की योजना बनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र से ही लाइफस्टाइल और खानपान में सुधार जरूरी है। उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की फर्टिलिटी और अंडों की गुणवत्ता प्राकृतिक रूप से कम होती जाती है। 35 वर्ष की उम्र के बाद अंडों की संख्या और गुणवत्ता तेजी से घटने लगती है। इसलिए यदि संभव हो तो 30 वर्ष से पहले परिवार की योजना बनाना बेहतर माना जाता है।
वजन को नियंत्रित रखें
अधिक वजन या मोटापा भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। मोटापे के कारण शरीर में इंसुलिन और हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे ओवुलेशन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और गर्भधारण में कठिनाई आती है। इसलिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के जरिए वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है।
धूम्रपान और शराब से दूरी रखें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार धूम्रपान और शराब की बढ़ती आदत महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। सिगरेट और शराब में मौजूद रसायन अंडों की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं और हार्मोनल संतुलन बिगाड़ सकते हैं। धूम्रपान से अंडाशय की उम्र तेजी से बढ़ती है और गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है।
इसके अलावा शराब और नशीले पदार्थ शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जिससे प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
तनाव को नियंत्रित करना भी जरूरी
लगातार तनाव में रहना भी फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। तनाव बढ़ने पर शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो प्रजनन हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकता है।
विशेषज्ञ महिलाओं को नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और रोजाना वॉक करने की सलाह देते हैं, जिससे तनाव कम होता है और शरीर का हार्मोनल संतुलन बेहतर बना रहता है।


