नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सुझाव दिया कि सिर्फ एनसीईआरटी को निर्देश देने के बजाय पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए केंद्र सरकार को विशेषज्ञ समिति गठित करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट एनसीईआरटी की क्लास आठ की सोशल साइंस की किताब से जुड़े एक सुओ मोटो केस की सुनवाई कर रहा था, जिसमें ज्यूडिशियरी में को लेकर आपत्तिजनक कंटेंट प्रकाशित किया गया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने एनसीईआरटी से सिर्फ कक्षा आठ की नहीं, बल्कि सभी क्लास की टेक्स्टबुक्स का समीक्षा करने को कहा है। उन्होंने बेंच को भरोसा दिलाया कि पाठ्यक्रम की जांच के लिए डोमेन विशेषज्ञ का एक पैनल बनाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत को बताया कि सरकार ने एनसीईआरटी को सिर्फ कक्षा आठ ही नहीं, बल्कि सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने को कहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पाठ्यक्रम की जांच के लिए विषय विशेषज्ञों का पैनल बनाया जाएगा।
मेहता ने यह भी बताया कि एनसीईआरटी की व्यवस्था में सुधार के लिए बड़े बदलाव शुरू कर दिए गए हैं। अब किसी भी नई सामग्री को प्रकाशित करने से पहले विशेषज्ञों की मंजूरी अनिवार्य होगी।
इसी बीच एनसीईआरटी के निदेशक ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी भी मांगी है।
इससे पहले 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उक्त पुस्तक की छपाई और इंटरनेट पर इसके वितरण पर रोक लगा दी थी। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि पुस्तक में लिखी बातें न्यायपालिका पर हमला करने जैसी हैं और इससे संस्था की गरिमा को ठेस पहुंची है।
अदालत ने इसे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की सोची-समझी साजिश करार देते हुए आदेश दिया कि बाजार में उपलब्ध पुस्तक की सभी प्रतियों को तत्काल जब्त कर सार्वजनिक पहुंच से हटा दिया जाए।



