पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंच गया है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे देशभर में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर लोगों के बीच घबराहट बढ़ गई है।
स्थिति यह है कि कई राज्यों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। पैनिक बुकिंग के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है। वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कमी से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों पर सीधा असर पड़ रहा है।
आम लोगों में क्या है चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की खबरों के बाद देशभर में गैस की कमी की आशंका फैल गई है। इसके चलते उपभोक्ता गैस खत्म होते ही तुरंत नया सिलेंडर बुक करा रहे हैं। इससे गैस एजेंसियों पर भीड़ बढ़ गई है और डिलीवरी सिस्टम पर दबाव आ गया है।
भारत के पास कच्चे तेल की तरह एलपीजी का बड़ा रणनीतिक भंडार नहीं है। आमतौर पर देश में केवल 25 से 30 दिन का एलपीजी स्टॉक रहता है। यही वजह है कि आयात में थोड़ी भी देरी का असर सीधे उपभोक्ताओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ने लगता है।
उत्तर प्रदेश और दिल्ली में कालाबाजारी
उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर में गैस की किल्लत के बीच कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। दिल्ली के कुछ इलाकों में घरेलू सिलेंडर, जो सामान्य तौर पर लगभग 1000 रुपये में मिलता है, उसे तत्काल डिलीवरी के नाम पर 2500 रुपये तक में बेचा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के आगरा में कमर्शियल सिलेंडर की भारी कमी बताई जा रही है। बाजार में चाय और समोसे के दाम तक बढ़ गए हैं। वाराणसी में कई जगह होटल और आश्रमों में भोजन बनाने के लिए लकड़ी और मिट्टी के चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है।
पंजाब-हरियाणा में उद्योग और शादियां प्रभावित
पंजाब और हरियाणा में भी कमर्शियल गैस की कमी का असर कारोबार और समारोहों पर दिख रहा है। चंडीगढ़ और मोहाली में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
हरियाणा के औद्योगिक शहर पानीपत में एलपीजी और पीएनजी की कमी के कारण लगभग 300 फैक्ट्रियां बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं। कई होटल और मिठाई की दुकानों में डीजल भट्ठियां फिर से चालू करनी पड़ी हैं।
पहाड़ी राज्यों में सप्लाई चेन प्रभावित
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में सप्लाई चेन पर ज्यादा असर देखा जा रहा है। देहरादून में कमर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता बेहद कम बताई जा रही है। कई रेस्टोरेंट संचालक अब इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जम्मू क्षेत्र में उपभोक्ताओं को 25-25 दिन तक रिफिल नहीं मिल रहा है। हालांकि प्रशासन का दावा है कि घाटी में 13 दिन का एलपीजी स्टॉक मौजूद है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में मेस प्रभावित
मध्य प्रदेश के इंदौर का प्रसिद्ध सराफा बाजार भी गैस संकट से प्रभावित हुआ है। कई दुकानदार इंडक्शन चूल्हों का सहारा ले रहे हैं।
राजस्थान के कोटा में गैस की कमी का असर छात्रावासों की मेस पर पड़ा है। कई जगह थाली में परोसे जाने वाले व्यंजनों की संख्या कम कर दी गई है।
बिहार-झारखंड में तकनीकी और औद्योगिक असर
बिहार की राजधानी पटना में ऑनलाइन गैस बुकिंग सिस्टम ठप होने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं झारखंड के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में गैस की आपूर्ति बाधित होने से करीब 1300 औद्योगिक इकाइयों का काम प्रभावित हुआ है।
सरकार ने क्या कहा
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने संसद में कहा है कि देश में घरेलू एलपीजी की कोई वास्तविक कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि 33 करोड़ परिवारों की रसोई सरकार की प्राथमिकता है और आपूर्ति सुरक्षित है।
उनके अनुसार मौजूदा समस्या आपूर्ति से ज्यादा पैनिक बुकिंग और जमाखोरी के कारण पैदा हुई है।
उत्पादन और आयात बढ़ाने की कोशिश
सरकार ने देश की रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते घरेलू उत्पादन में लगभग 25 से 28 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अलावा होर्मुज मार्ग पर निर्भरता कम करने के लिए अन्य समुद्री मार्गों से आयात भी बढ़ाया गया है।
कमर्शियल गैस के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के कारण कमर्शियल गैस की सप्लाई में कटौती की गई है। इसके विकल्प के तौर पर सरकार ने अतिरिक्त केरोसिन उपलब्ध कराया है। साथ ही कुछ समय के लिए होटल और रेस्टोरेंट को कोयला और बायोमास जैसे ईंधन इस्तेमाल करने की छूट दी गई है।
प्रशासन सतर्क
जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए राज्यों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कई जगह छापेमारी भी की गई है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
क्या सचमुच गैस संकट है
जमीनी स्थिति से यह स्पष्ट है कि घरेलू गैस की आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन कमर्शियल गैस की कमी से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। पैनिक बुकिंग और अफवाहों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते, तब तक सरकार को वैकल्पिक ईंधन और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के जरिए आपूर्ति व्यवस्था बनाए रखनी होगी।



