देहरादून/रुद्रपुर। उत्तराखंड के मैदानी जिलों की 15 विधानसभा सीटों पर 20 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं का पता नहीं चल पाने से सियासी दलों की चिंता बढ़ गई है। सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों ही इस स्थिति को लेकर सतर्क हो गए हैं। ये सभी सीटें ऐसी हैं, जहां या तो पहाड़ से पलायन कर लोग आकर बसे हैं या फिर दूसरे राज्यों के निवासी बड़ी संख्या में रह रहे हैं।
चुनाव आयोग की ओर से प्री-एसआईआर (Special Intensive Revision) के तहत मतदाताओं की बीएलओ मैपिंग कराई जा रही है। प्रदेश में कुल मैपिंग का आंकड़ा 85 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुका है, लेकिन देहरादून और ऊधमसिंह नगर की 15 विधानसभा सीटों पर यह 80 प्रतिशत से भी नीचे है। इसका सीधा अर्थ है कि करीब 20 प्रतिशत मतदाताओं का वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट से मिलान नहीं हो पा रहा है।
इन 15 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 23,33,278 मतदाताओं में से 17,41,235 का मिलान हो चुका है, जबकि 5,92,043 मतदाता ऐसे हैं, जिनका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने पर इन मतदाताओं के नाम कटने की आशंका जताई जा रही है।
पलायन और बाहरी आबादी बनी वजह
विश्लेषकों का मानना है कि रुद्रपुर, धर्मपुर, मसूरी, राजपुर रोड, देहरादून कैंट, ऋषिकेश, काशीपुर, रायपुर, डोईवाला, विकासनगर, सहसपुर, किच्छा, नानकमत्ता, जसपुर और बाजपुर जैसी सीटों पर बड़ी संख्या में पलायन कर आए लोग या बाहरी राज्यों के निवासी बसे हुए हैं। माना जा रहा है कि इनमें से कई मतदाता अपने मूल गांव या राज्य में ही वोट रखना पसंद करते हैं, जिससे स्थानीय सूची में उनका मिलान नहीं हो पा रहा है।
देहरादून की नौ सीटें 80% से नीचे
देहरादून जिले की 10 में से 9 विधानसभा सीटों पर मैपिंग 80 प्रतिशत से कम है, जो प्रशासन और राजनीतिक दलों के लिए चुनौती बनी हुई है।
राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी
भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने बताया कि पार्टी ने एसआईआर को लेकर तैयारी शुरू कर दी है और पन्ना प्रमुख तक पहुंच बनाकर हर मतदाता का सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि किसी भी वैध मतदाता का नाम कटने नहीं दिया जाएगा और न ही किसी अवैध नाम को सूची में शामिल होने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि एक मतदाता का नाम केवल एक ही वोटर लिस्ट में दर्ज हो।
प्रमुख सीटों की स्थिति (संक्षेप में)
- रुद्रपुर: 69.32% मैपिंग, 62,861 शेष
- धर्मपुर: ~70%, 58,221 शेष
- मसूरी: ~70%, बड़ी संख्या में शेष
- राजपुर रोड: 70.45%, 31,515 शेष
- देहरादून कैंट: 71.07%, 34,758 शेष
- ऋषिकेश: 72.72%, 45,983 शेष
- काशीपुर: 72.80%, 47,459 शेष
- रायपुर: ~73%, 45,501 शेष
- डोईवाला: 76.38%, 41,595 शेष
- विकासनगर: 77.82%, 26,099 शेष
- सहसपुर: 78.51%, 41,265 शेष
- किच्छा: 78.66%, 32,707 शेष
- नानकमत्ता: 79.28%, 26,126 शेष
- जसपुर: 79.78%, 27,537 शेष
- बाजपुर: 79.84%, 33,330 शेष
स्पष्ट है कि प्री-एसआईआर प्रक्रिया के दौरान इन सीटों पर मतदाताओं की पहचान और सत्यापन एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिस पर प्रशासन और राजनीतिक दलों की नजर टिकी है।



