देश में आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर हल्का झटका लगा है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.48 प्रतिशत पहुंच गई। मार्च में यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत था। हालांकि राहत की बात यह है कि महंगाई दर अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के चार प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।
खाद्य महंगाई में तेजी, ग्रामीण इलाकों पर ज्यादा असर
अप्रैल में खाद्य महंगाई दर 3.87 प्रतिशत से बढ़कर 4.20 प्रतिशत हो गई। इसका सबसे ज्यादा असर रोजमर्रा के घरेलू बजट पर पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई शहरी इलाकों की तुलना में अधिक रही, जिससे गांवों में रहने वाले लोगों की रसोई का खर्च बढ़ा है।
टमाटर महंगा, आलू-प्याज से राहत
सब्जियों की कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। टमाटर की कीमतों में सालाना आधार पर 35.28 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी। वहीं आलू और प्याज की कीमतों में गिरावट से कुछ राहत मिली है। आलू के दाम 23.69 प्रतिशत और प्याज के दाम 17.67 प्रतिशत तक घटे हैं।
पर्सनल केयर उत्पादों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी
अप्रैल में सबसे अधिक महंगाई पर्सनल केयर और विविध वस्तुओं की श्रेणी में दर्ज की गई। इस वर्ग में कीमतें 17.66 प्रतिशत तक बढ़ीं। दूसरी ओर ईंधन कीमतों में नरमी के चलते परिवहन महंगाई दर लगभग स्थिर रही और यह -0.01 प्रतिशत पर दर्ज की गई। इससे माल ढुलाई और यात्रा लागत में बड़ी बढ़ोतरी नहीं हुई।
आरबीआई के लक्ष्य से नीचे महंगाई
सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के लिए फिलहाल स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है। भारत ने 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक खुदरा महंगाई का लक्ष्य चार प्रतिशत तय रखा है, जिसमें दो से छह प्रतिशत का दायरा निर्धारित किया गया है।
विशेषज्ञों के एक सर्वे में अप्रैल में खुदरा महंगाई 3.8 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। ऐसे में 3.48 प्रतिशत का मौजूदा आंकड़ा उम्मीद से बेहतर माना जा रहा है। हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भविष्य में दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इस पर आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति में खास नजर रहेगी।



