नई दिल्ली। 6 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ कारोबारी सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में जबरदस्त उतार-चढ़ाव के लिए याद किया जाएगा। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच बाजार ने जिस तरह से दमदार वापसी की, उसने निवेशकों को चौंका दिया।
सप्ताह की शुरुआत सोमवार को भारी गिरावट के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स 73,477.53 पर खुला और शुरुआती कारोबार में 72,728.66 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। हालांकि, दोपहर बाद अमेरिका-ईरान युद्धविराम की खबरों से बाजार में सुधार आया और सेंसेक्स 74,106.85 पर बंद हुआ। मंगलवार को तेजी जारी रही और सूचकांक 74,616.58 तक पहुंच गया।
बुधवार को बाजार ने ऐतिहासिक छलांग लगाई। दो हफ्ते के सशर्त युद्धविराम की घोषणा के बाद सेंसेक्स 2,946 अंक (करीब 4%) उछलकर 77,562.90 पर पहुंच गया। गुरुवार को इस्राइल के लेबनान में हमले के बाद बाजार फिर दबाव में आ गया और 931.25 अंक गिरकर 76,631.65 पर बंद हुआ।
सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को बैंकिंग और ऑटो शेयरों में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स 918.60 अंक (1.20%) चढ़कर 77,550.25 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 22,600 के निचले स्तर से उछलकर 24,050.60 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 4,745.57 अंक (6.52%) मजबूत हुआ।
वैश्विक संकट का असर
बाजार की इस उथल-पुथल के पीछे पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट मुख्य कारण रहा। ईरान-इस्राइल तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, जिससे महंगाई का खतरा बढ़ गया। हालांकि, युद्धविराम की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमत 16% गिरकर 94.36 डॉलर पर आ गई, जिससे बाजार में राहत की लहर दौड़ी।
इस दौरान रुपया भी दबाव में रहा और डॉलर के मुकाबले 95.30 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया, लेकिन आरबीआई के हस्तक्षेप से यह संभलकर 92.45 पर आ गया।
घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार
सप्ताह भर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) ने लगातार बिकवाली की, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को सहारा दिया। 6 अप्रैल और 8 अप्रैल को डीआईआई ने बड़े पैमाने पर खरीदारी कर गिरावट को थाम लिया। मजबूत घरेलू निवेश, खासकर एसआईपी के जरिए आने वाला पैसा, बाजार की मजबूती का बड़ा आधार बना।
किन सेक्टर्स में रही हलचल
धातु और खनन क्षेत्र के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। हिंडाल्को और टाटा स्टील जैसे शेयरों में मजबूत खरीदारी हुई। बैंकिंग सेक्टर ने भी बाजार को सहारा दिया। वहीं आईटी शेयरों में टीसीएस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक में मुनाफावसूली देखने को मिली।
अनिश्चितता के माहौल में सोना भी निवेशकों की पहली पसंद बना रहा और इसकी कीमत 1,50,900 रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गई।
निवेशकों के लिए संकेत
विश्व बैंक ने महंगी ऊर्जा और वैश्विक तनाव के चलते भारत की विकास दर का अनुमान 7.6% से घटाकर 6.6% कर दिया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहते हुए मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही निवेश करना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच ‘बाय ऑन डिप्स’ की रणनीति अपनाना ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।



