नीट यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद प्रतियोगी छात्रों में भारी निराशा और आक्रोश देखने को मिल रहा है। अमर उजाला की टीम ने राजस्थान में रहकर तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं से बातचीत की। छात्रों ने कहा कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने उनकी मेहनत और परीक्षा प्रणाली पर भरोसा दोनों को कमजोर कर दिया है। कई छात्रों ने सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
‘दो साल की मेहनत पर लगा बड़ा झटका’
जयपुर में रहकर नीट की तैयारी कर रहे छात्र अमित मीणा ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष परीक्षा दी थी और उन्हें 500 से अधिक अंक आने की उम्मीद थी। एसटी वर्ग से आने वाले अमित का कहना है कि इस बार उनका चयन होने की पूरी संभावना थी।
उन्होंने कहा, “मैं पिछले दो वर्षों से लगातार तैयारी कर रहा हूं। मेरे पिता किसान हैं और खेती करके ही मेरी पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। परीक्षा रद्द होने से बहुत बड़ा झटका लगा है।”
‘हर साल पेपर लीक से भविष्य हो रहा बर्बाद’
जयपुर की एक छात्रा ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं का सबसे ज्यादा नुकसान मेहनती छात्रों को उठाना पड़ रहा है। छात्रा के अनुसार, “2024 में पेपर लीक हुआ, 2025 में पेपर बेहद कठिन आया और अब 2026 में फिर से गड़बड़ी सामने आ गई। माता-पिता मेहनत से पैसे जुटाते हैं, लेकिन एक फैसले से सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है।”
‘सरकार की लापरवाही से पढ़ाई से हटने लगा मन’
अलवर की रहने वाली छात्रा साक्षी ने बताया कि वह जयपुर में किराए के कमरे में रहकर पिछले एक साल से तैयारी कर रही थीं। यह उनका पहला प्रयास था।
साक्षी ने कहा, “सरकार की लापरवाही की वजह से परीक्षा रद्द हो गई। अब पढ़ाई से मन हटने लगा है।” बातचीत के दौरान उन्होंने व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जताई।
हर महीने 10 हजार रुपये खर्च, फिर भी नहीं मिला परिणाम
धौलपुर की छात्रा सुनैना तोमर ने बताया कि नीट की तैयारी में हर महीने 10 हजार रुपये से अधिक खर्च होता है। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें चयन की पूरी उम्मीद थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने से सारी उम्मीदें टूट गईं।
‘अच्छा पेपर गया था, अब उम्मीद टूट रही’
कोटा में रहकर तैयारी कर रही छात्रा रिया ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से लगातार मेहनत कर रही थीं और इस बार परीक्षा भी अच्छी गई थी।
उन्होंने कहा, “मुझे पूरा भरोसा था कि इस बार चयन हो जाएगा, लेकिन परीक्षा रद्द होने से उम्मीद टूटती नजर आ रही है। यह मेरे लिए बड़ा झटका है।”
एनटीए की व्यवस्था पर छात्रों ने उठाए सवाल
कोटा की छात्रा ओजस्वनी विजय ने कहा कि मामला बड़े स्तर का है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि दोबारा परीक्षा आयोजित की जाती है तो एजेंसी को यह भरोसा देना होगा कि इस बार किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होगी।
उन्होंने कहा, “जब तक पारदर्शिता और सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक छात्रों का भरोसा वापस नहीं आएगा।”
‘दो महीने में फिर तैयारी करना आसान नहीं’
कोटा में रहकर पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने कहा कि दो महीने के भीतर फिर से परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं है। छात्र ने बताया कि परीक्षा के बाद वे परिणाम का इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब दोबारा तैयारी का दबाव बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को जिम्मेदारी तय करनी चाहिए ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े।



