काशीपुर में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के 13वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में 546 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य न्यायाधीश गुहानाथन नरेंद्र ने कहा कि विद्यार्थियों ने दृढ़ता, अनुशासन और संकल्प के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। प्रत्येक डिग्री उनके धैर्य और परिश्रम का प्रतीक है।
आईआईएम परिसर में आयोजित समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि गुहानाथन नरेंद्र, विशिष्ट अतिथि कमल पोद्दार (प्रबंध निदेशक, चॉइस इंटरनेशनल लिमिटेड, मुंबई), संस्थान अध्यक्ष संदीप सिंह और निदेशक प्रो. नीरज द्विवेदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि करियर के शुरुआती दौर में जोखिम लेने से नहीं डरना चाहिए, क्योंकि विकास कभी आराम के दायरे में नहीं होता। उन्होंने कहा कि शक्ति और प्रभाव के बीच का अंतर मूल्यों में निहित है। अपने निर्णय ऐसे हों, जो दूसरों को आगे बढ़ाएं, नेतृत्व ईमानदारी के साथ हो और कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति दृढ़ बना रहे।
विशिष्ट अतिथि कमल पोद्दार ने कहा कि वास्तविक यात्रा परिसर से बाहर निकलने के बाद शुरू होती है, जहां आत्म-प्रेरणा और अनुकूलनशीलता सफलता की कुंजी होती है। उन्होंने भारत की विकास क्षमता पर बल देते हुए विद्यार्थियों को अवसरों का लाभ उठाने और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया।
संस्थान अध्यक्ष संदीप सिंह ने कहा कि संस्थान से बाहर निकलते ही विद्यार्थी ऐसे विश्व में प्रवेश करेंगे, जो अभूतपूर्व अवसरों और जटिल चुनौतियों से भरा है। उन्होंने कहा कि सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन पर पड़े सकारात्मक प्रभाव से मापा जाना चाहिए।
समारोह के दौरान कुल 546 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।



