नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मंगलवार को सदन में जोरदार हंगामा हुआ। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इससे पहले कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि सदन में पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है, लेकिन उस समय डिप्टी स्पीकर चेयर पर मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आज विपक्ष के करीब 200 सांसद होने के बावजूद सदन में डिप्टी स्पीकर नहीं है और विपक्ष के नेताओं को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है।
गोगोई ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि संसद की मर्यादा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए लाया गया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के रेबिया केस का हवाला देते हुए कहा कि स्पीकर या चेयर पर बैठने वाले व्यक्ति को निष्पक्ष रहना चाहिए।
गोगोई के बयान पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि गोगोई नियमों की गलत व्याख्या कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब सदन चुनाव में जाता है तब भी स्पीकर का कार्यालय कार्य करता रहता है और यह पद कभी खाली नहीं रहता।
इस दौरान भाजपा सांसद Jagadambika Pal की अध्यक्षता को सरकार का समर्थन मिला। केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव चर्चा में होता है तो स्पीकर स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करते। ऐसे में चेयरपर्सन पैनल का कोई भी सदस्य कार्यवाही चला सकता है और इसी आधार पर जगदंबिका पाल सदन की कार्यवाही संचालित कर रहे हैं।
डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति को लेकर भी सदन में बहस तेज हो गई। कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आरोप लगाया कि सरकार ने कई वर्षों से डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखा है, जिससे संवैधानिक स्थिति पर सवाल खड़े होते हैं। वहीं भाजपा नेता Ravi Shankar Prasad ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि संसद की कार्यवाही पूरी तरह नियमों के अनुसार चल रही है।
इससे पहले कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने लोकसभा में स्पीकर को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया। प्रस्ताव पेश होते ही हैदराबाद से सांसद Asaduddin Owaisi ने नियम पुस्तिका का हवाला देते हुए पीठासीन अध्यक्ष पर आपत्ति जताई। इस पर भाजपा सांसद Nishikant Dubey ने कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर जैसी शक्तियां रखता है और सदन की कार्यवाही चला सकता है।
पीठासीन अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया है। हालांकि हंगामे के चलते पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक और बाद में दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
वहीं राज्यसभा में सदन के नेता J. P. Nadda ने विपक्ष के वॉकआउट की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष सदन के अंदर गंभीर मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहता और बार-बार हंगामे का सहारा ले रहा है।



