शक्तिफार्म। तहसील प्रशासन ने चीकाघाट, तुर्कातिसौर और कल्याणपुर के बाद अब शक्तिफार्म क्षेत्र में भी बेमौसमी धान की नर्सरी नष्ट कर दी। कार्रवाई के दौरान किसानों और महिलाओं ने विरोध जताते हुए ट्रैक्टर के सामने खड़े होकर नर्सरी नष्ट करने से रोकने की कोशिश की।
सोमवार को तहसीलदार हिमांशु जोशी के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम निर्मलनगर गांव पहुंची और खेतों में तैयार बेमौसमी धान की नर्सरी को नष्ट कराया। कार्रवाई की सूचना मिलते ही खेत मालिक और आसपास के किसान मौके पर पहुंच गए। महिलाओं ने ट्रैक्टर के आगे खड़े होकर कार्रवाई का विरोध किया। इस दौरान टीम ने लोगों को सरकारी कार्य में बाधा न डालने की चेतावनी भी दी। किसानों ने नर्सरी नष्ट होने से परिवार पर आर्थिक संकट आने की बात कही।
बेमौसम धान पर प्रतिबंध : तहसीलदार
तहसीलदार हिमांशु जोशी ने बताया कि बेमौसमी धान की खेती पर प्रतिबंध है, इसके बावजूद किसान नर्सरी तैयार कर रहे हैं। इससे फसल चक्र प्रभावित होने के साथ ही कीट और रोगों का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही भूजल स्तर भी तेजी से गिरता है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं बेमौसमी धान की नर्सरी पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि दलदली जमीन वाले किसान प्रशासन से अनुमति लेकर धान लगा सकते हैं।
किसानों ने उठाए सवाल
सहकारी समिति शक्तिफार्म के अध्यक्ष कृष्णपद मंडल ने कहा कि सिडकुल के उद्योगों में सैकड़ों समरसेविल लगे हैं, जिनसे रोजाना हजारों लीटर पानी की बर्बादी होती है। भूजल स्तर गिरने का मुख्य कारण वही है, न कि गर्मी में होने वाली धान की खेती। प्रशासन को किसानों की बजाय पानी बर्बाद करने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
निर्मलनगर की पूर्णिमा राय ने बताया कि उनकी जमीन नीची और दलदली है। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण जलभराव रहता है, जिससे धान के अलावा दूसरी फसल उगाना संभव नहीं है। इसी कारण उन्होंने धान की नर्सरी तैयार की थी।
वहीं सीमा राय ने कहा कि रबी सीजन में लगाई गई सरसों की फसल बारिश के कारण हुए जलभराव में नष्ट हो गई थी। ऐसे में बेमौसमी धान की फसल से ही परिवार के भरण-पोषण की उम्मीद थी, लेकिन प्रशासन ने उस पर भी रोक लगा दी है।



