नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और Enforcement Directorate (ईडी) के बीच चल रहे विवाद में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है, तो यह केवल राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि कानून के शासन और संवैधानिक मर्यादा का गंभीर मुद्दा है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस तरह का आचरण लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
अदालत की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्र की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रुख पर कड़े सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि किसी सक्रिय तलाशी अभियान के दौरान मुख्यमंत्री जैसे उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति का मौके पर पहुंचना जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है।
पीठ ने राज्य सरकार के वकील से पूछा, “क्या ईडी अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद वे मूकदर्शक बने रहें?”
‘लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल केंद्र और राज्य के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के आचरण से जुड़ा है, जो लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि संविधान के विशेषज्ञों ने भी शायद ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की होगी, जहां कोई मुख्यमंत्री स्वयं जांच एजेंसी की कार्रवाई में हस्तक्षेप करे।
अनुच्छेद 32 पर बहस
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि ईडी एक सरकारी संस्था है, इसलिए वह अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर नहीं कर सकती। इस पर अदालत ने कहा कि ईडी के अधिकारी भी नागरिक हैं और यदि उन्हें ड्यूटी करने से रोका जाता है या डराया जाता है, तो यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला जनवरी 2026 में कोयला घोटाले की जांच के दौरान आई-पैक कार्यालय और उसके निदेशक के आवास पर हुई छापेमारी से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि 8 जनवरी को छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं और कार्रवाई में हस्तक्षेप किया।
एजेंसी के मुताबिक, इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और एक अधिकारी का मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया गया।
वहीं, राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ईडी का दुरुपयोग राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि उन्हें हथियारबंद लोगों के प्रवेश की सूचना मिली थी, जिसके चलते सुरक्षा के तहत कार्रवाई की गई।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर पर रोक लगा दी है। साथ ही, राज्य सरकार को घटनास्थल की पूरी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के हस्तक्षेप को अनुमति दी गई, तो देश में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है और निष्पक्ष जांच संभव नहीं रह जाएगी।



