पटना। नीतीश कुमार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया। करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता संभालने के बाद उनके इस फैसले को राज्य की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से बिहारवासियों के नाम भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि 24 नवंबर 2005 को राज्य में पहली बार एनडीए सरकार बनी थी और तब से बिहार में कानून का राज स्थापित हुआ। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने सभी वर्गों—हिंदू, मुस्लिम, उच्च, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और महादलित—के विकास के लिए निरंतर काम किया है।
उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और कृषि जैसे सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। साथ ही महिलाओं और युवाओं के सशक्तिकरण के लिए भी कई योजनाएं चलाई गईं।
नीतीश कुमार ने आगे कहा कि हाल के वर्षों में विकास कार्यों को और गति दी गई है। वर्ष 2025 से 2030 के लिए ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम तैयार किया गया है, जिससे राज्य के विकास को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने केंद्र सरकार के सहयोग के लिए नरेंद्र मोदी का आभार भी जताया।
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से बिहार की सेवा कर रहे थे और पहले ही मुख्यमंत्री पद छोड़ने का निर्णय ले चुके थे। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद उन्होंने राज्यपाल से मिलकर औपचारिक रूप से इस्तीफा सौंप दिया।
उन्होंने भरोसा जताया कि नई सरकार राज्य के विकास कार्यों को आगे बढ़ाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वह नई सरकार को पूरा सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे।
नीतीश कुमार ने अंत में विश्वास जताया कि बिहार निरंतर प्रगति करेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह बनाएगा।



