बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव सामने आया है। सम्राट चौधरी के नाम पर मुख्यमंत्री की आधिकारिक मुहर लगते ही उनके पैतृक गांव लखनपुर (तारापुर, मुंगेर) में जश्न का माहौल चरम पर पहुंच गया। ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और लोग इसे अपने क्षेत्र के लिए गर्व और ऐतिहासिक पल मान रहे हैं।
गांव के बुजुर्गों और उनके बचपन के साथियों ने सम्राट चौधरी से जुड़ी कई यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उस समय गांव में केवल एक मदरसा था, जहां सभी समुदायों के बच्चे साथ पढ़ते थे। इसी मदरसे से सम्राट चौधरी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। यहां हिंदी, उर्दू और संस्कृत तीनों भाषाएं सिखाई जाती थीं। खास बात यह रही कि उन्होंने ‘क, ख’ से पहले ‘अलिफ, बे’ सीखकर अपनी पढ़ाई की शुरुआत की थी।
बचपन में पढ़ाई के साथ-साथ सम्राट चौधरी खेलकूद में भी काफी सक्रिय रहे। उन्हें विशेष रूप से क्रिकेट का शौक था। ग्रामीणों के अनुसार, उनके पिता शकुनि चौधरी चाहते थे कि वे क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करें और इसी कारण कई बार उन्हें डांट भी पड़ती थी। हालांकि, खेल के दौरान साथियों के बीच नोकझोंक जरूर होती थी, लेकिन आपसी भाईचारा हमेशा कायम रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी सम्राट चौधरी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। जब भी वे गांव आते हैं, अपने पुराने दोस्तों से जरूर मिलते हैं और सादगी बनाए रखते हैं।
उर्दू मध्य विद्यालय लखनपुर के प्रधानाध्यापक मोहम्मद ताबीर ने बताया कि पहले यह एक मदरसा था, जहां सम्राट चौधरी ने पढ़ाई की थी, जो अब विद्यालय के रूप में संचालित हो रहा है। उनके मुख्यमंत्री बनने से पूरे इलाके में खुशी और उत्साह का माहौल है।



