June 26, 2026 - 2:34 am

भाजपा-कांग्रेस की राह में चुनौती बन सकता है उक्रांद, 2027 में तीसरे विकल्प की तैयारी

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राज्य निर्माण आंदोलन से निकला उत्तराखंड क्रांति दल एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय नजर आने लगा है। दल की बढ़ती गतिविधियां आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां स्थानीय मुद्दे चुनावी केंद्र में रहते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि उक्रांद संगठनात्मक मजबूती के साथ जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाता है, तो वह प्रदेश में तीसरे विकल्प के रूप में उभर सकता है।

अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर गठित उक्रांद से आज भी राज्य आंदोलन से जुड़े लोग, पुराने कार्यकर्ता और क्षेत्रीय पहचान को महत्व देने वाला वर्ग भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है। पिछले कुछ समय से दल के कार्यकर्ता प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय अभियान चला रहे हैं। वहीं, कई प्रमुख हस्तियों के दल से जुड़ने से कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है।

दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने दावा किया कि समाज में सकारात्मक सोच रखने वाले लोग लगातार उक्रांद की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में और लोग दल से जुड़ेंगे, जिससे संगठन को मजबूती मिलेगी। ऐरी ने भाजपा और कांग्रेस पर राज्य की उपेक्षा तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 26 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मूल मुद्दों पर अपेक्षित कार्य नहीं हुआ।

सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी

उक्रांद नेताओं ने संकेत दिए हैं कि पार्टी प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि समान विचारधारा वाले दलों और संगठनों के साथ चुनावी तालमेल की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

उक्रांद से जुड़े प्रमुख चेहरे

हाल के दिनों में पूर्व कुलपति यूएस रावत, प्रो. जेपी पंवार, कर्नल शक्ति बजाज, पूर्व सीएमओ डॉ. बीएस रावत, डॉ. रघुवीर सिंह, पूर्व आईएफएस एमएस पाल और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरीश जुगरान समेत कई प्रमुख लोग उक्रांद में शामिल हुए हैं।

इन मुद्दों पर उक्रांद बना सकता है पकड़
  • पर्वतीय क्षेत्रों में क्षेत्रीय भावनाओं का पुनर्जीवन
  • बेरोजगारी, पलायन, भू-कानून और मूल निवास जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख
  • भाजपा और कांग्रेस से नाराज मतदाताओं के लिए विकल्प बनने की कोशिश
  • राज्य आंदोलन से जुड़े पुराने नेताओं और बुद्धिजीवियों का समर्थन मिलने की संभावना
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