उत्तराखंड की जेलों में बंदियों की बढ़ती भीड़ पर अब काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। वर्ष 2021 में राज्य की जेलों में क्षमता के मुकाबले 185 फीसदी कैदी बंद थे, लेकिन जेल प्रबंधन और आधारभूत सुविधाओं में सुधार के बाद यह आंकड़ा घटकर 118 फीसदी तक पहुंच गया है। कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में यह दावा किया।
विभाग के अनुसार, वर्ष 2021 से 2023 तक उत्तराखंड देश की सबसे अधिक भीड़भाड़ वाली जेलों वाले राज्यों में शामिल था। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट में भी इसका उल्लेख किया गया था। हालांकि, लगातार किए गए सुधारों और नई व्यवस्थाओं के कारण अब स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
डीआईजी जेल दधिराम ने बताया कि हरिद्वार समेत कई बड़ी जेलों में नई बैरकों का निर्माण किया गया है। पिथौरागढ़ जिला कारागार का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि देहरादून, हरिद्वार और सितारगंज केंद्रीय कारागार के विस्तार का कार्य जारी है। अल्मोड़ा में नई जिला जेल भी बनाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि अल्प सजा वाले कैदियों की रिहाई, गरीब बंदियों को जमानत दिलाने और ‘सपोर्ट टू पुअर प्रिजनर्स स्कीम’ लागू करने का भी सकारात्मक असर पड़ा है। इसी वजह से उत्तराखंड अब देश की सबसे ओवरक्राउडेड जेलों की सूची से बाहर निकल गया है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में राज्य की जेलों में क्षमता के मुकाबले 141 फीसदी बंदी थे। यह आंकड़ा वर्ष 2025 में घटकर 124 फीसदी हुआ और वर्तमान में 118 फीसदी रह गया है।
वर्षवार स्थिति
| वर्ष | जेलों की क्षमता | बंदियों की संख्या |
|---|---|---|
| 2021 | 3741 | 6921 |
| 2022 | 3741 | 6858 |
| 2023 | 3761 | 6885 |
| 2024 | 3921 | 5548 |
| 2025 | 3961 | 4912 |
| 2026 | 3961 | 4703 |
ये कदम बने राहत की वजह
- हरिद्वार जेल में नई बैरकों का निर्माण
- पिथौरागढ़ जिला कारागार का निर्माण पूरा
- देहरादून और हरिद्वार जेलों का विस्तार जारी
- सितारगंज केंद्रीय कारागार के विस्तार पर काम
- अल्मोड़ा में नई जिला जेल का निर्माण
- अल्प सजा वाले कैदियों की रिहाई और जमानत में मदद
- गरीब बंदियों के लिए ‘सपोर्ट टू पुअर प्रिजनर्स स्कीम’ लागू



