May 10, 2026 - 5:10 pm

Uttarakhand: गुमनाम शिकायत से मिलेगी राहत, साइबर अपराध पोर्टल पर पहचान छिपाकर दर्ज करें शिकायत

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डिजिटल दौर में ऑनलाइन उत्पीड़न और साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कई बार पीड़ित पहचान उजागर होने के डर या शर्मिंदगी के कारण शिकायत दर्ज नहीं करा पाते। ऐसे लोगों के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर गुमनाम शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध है।

पोर्टल पर विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों की शिकायत बिना पहचान बताए दर्ज की जा सकती है। इसके लिए पीड़ित को सबसे पहले साइबर क्राइम पोर्टल की वेबसाइट पर जाकर ‘वुमेन/चिल्ड्रन रिलेटेड क्राइम’ सेक्शन खोलना होगा। इसके बाद ‘रजिस्टर एनोनिमसली’ विकल्प चुनकर शिकायत प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

शिकायत दर्ज करते समय घटना का प्रकार, तारीख, समय और संबंधित प्लेटफॉर्म की जानकारी भरनी होती है। साथ ही राज्य और जिला चयन करने के बाद आरोपी की आईडी, प्रोफाइल लिंक या यूआरएल जैसी जानकारी भी अपलोड की जा सकती है। पीड़ित स्क्रीनशॉट, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी पोर्टल पर जमा कर सकते हैं। सभी विवरण सत्यापित करने के बाद ‘कन्फर्म एंड सबमिट’ पर क्लिक करते ही शिकायत दर्ज हो जाती है।

डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत डिजिटल साक्ष्य जांच और कार्रवाई में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए ऑनलाइन धमकी, अश्लील संदेश, फर्जी प्रोफाइल, ब्लैकमेलिंग या सोशल मीडिया उत्पीड़न जैसे मामलों में स्क्रीनशॉट और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने कहा कि लोग कई बार पहचान उजागर होने के डर से शिकायत करने से बचते हैं। इसी वजह से साइबर क्राइम पोर्टल पर गुमनाम शिकायत की व्यवस्था की गई है। उन्होंने लोगों से साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। साथ ही कहा कि साइबर ठगी या ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

फेक लोन ऐप्स से सावधान रहने की सलाह

साइबर पुलिस ने फेक लोन ऐप्स के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। पुलिस के अनुसार हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें साइबर ठग आसान और तुरंत लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं।

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आसान लोन के आकर्षक विज्ञापन दिखाकर लोगों को फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है। जैसे ही व्यक्ति लिंक पर क्लिक कर ऐप इंस्टॉल करता है, ऐप मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स, गैलरी और अन्य निजी डाटा तक पहुंच बना लेता है। इसके बाद ठग तस्वीरों को एडिट कर आपत्तिजनक फोटो तैयार करते हैं और उन्हें रिश्तेदारों व परिचितों को भेजने की धमकी देकर पैसे वसूलते हैं।

उन्होंने कहा कि बदनामी के डर से कई लोग ठगों के दबाव में आकर रकम भी ट्रांसफर कर देते हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि किसी भी अनजान या बिना सत्यापन वाले लोन ऐप को डाउनलोड न करें। सोशल मीडिया पर दिखने वाले लुभावने विज्ञापनों और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और रिव्यू जरूर जांच लें।

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