प्रदेश के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में जनगणना का कार्य शुरू होते ही सबसे पहले नजरी नक्शे तैयार किए गए, जिससे पहले चरण का काम काफी आसान हो गया है। हालांकि, किसी भी क्षेत्र में आपदा जैसी स्थिति बनने पर जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की मदद ली जाएगी।
प्रदेश में चल रही जनगणना के पहले चरण को लेकर निदेशक जनगणना इवा आशीष श्रीवास्तव ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कई अहम जानकारियां साझा कीं।
उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों और उनके अंतर्गत आने वाले चार्जों में 25 अप्रैल से कार्य शुरू हो चुका है। शुरुआती तीन दिनों में प्रगणकों ने अपने-अपने क्षेत्रों का भ्रमण कर नजरी नक्शे तैयार किए। इसके बाद मकानों के सूचीकरण और आंकड़े जुटाने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पलायन के कारण खाली पड़े मकानों को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चरण का मुख्य उद्देश्य सभी प्रकार के मकानों का सूचीकरण करना है। चाहे मकान खाली हो, उसमें लोग रह रहे हों या वह गैर-आवासीय उपयोग में हो, हर भवन का पंजीकरण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था पर आधारित है। एचएलबीसी पोर्टल के माध्यम से प्रदेश को 29,622 ब्लॉक्स में विभाजित कर प्रगणकों को डिजिटल नक्शे उपलब्ध कराए गए हैं। आंकड़े जुटाने के लिए एंड्रॉयड और आईओएस आधारित एचएलओ मोबाइल एप तैयार किया गया है। इसके साथ ही सीएमएमएस पोर्टल के जरिए प्रगणकों और सुपरवाइजरों को कार्य आवंटन से लेकर रियल टाइम मॉनिटरिंग तक की व्यवस्था की गई है।
फील्ड स्टाफ को तकनीकी दिक्कत न हो, इसके लिए त्रिस्तरीय प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रगणकों को एप और पोर्टल पर हैंड्स ऑन प्रैक्टिस कराने के साथ फील्ड में मॉक ड्रिल भी करवाई गई है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई परिवार 24 मई तक घर पर उपलब्ध नहीं होता है, तब भी उसका डेटा नहीं छूटेगा। यदि 30 दिनों की अवधि में परिवार का कोई सदस्य एक दिन भी घर पर मौजूद रहता है तो वह जानकारी दे सकता है। लगातार अनुपस्थित रहने पर मकान को ‘लॉक्ड’ श्रेणी में दर्ज किया जाएगा।
सीमावर्ती और आपदा संभावित इलाकों को लेकर उन्होंने कहा कि सामान्य नागरिकों की गणना नियमित प्रक्रिया से की जा रही है, जबकि सैन्य और अर्द्धसैनिक इकाइयों की गणना दूसरे चरण में होगी। किसी भी आपात स्थिति में जिला प्रशासन अपने स्तर पर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
जनगणना कार्य की धीमी रफ्तार संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में नक्शा तैयार करने के कारण गति कम दिखाई दी, लेकिन अब सभी चार्ज अधिकारियों को तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। सात मई 2026 तक राज्य के 18,699 ब्लॉक्स में काम सक्रिय रूप से शुरू हो चुका है।
आम जनता की सुविधा के लिए निदेशालय ने हेल्पलाइन नंबर 1855 भी जारी किया है। इस नंबर पर सोमवार से शुक्रवार सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक जनगणना से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।



