जगुआर लैंड रोवर इंडिया लिमिटेड की 1.65 करोड़ रुपये कीमत वाली डिफेंडर कार विज्ञापन में किए गए रफ्तार के दावे पर खरी नहीं उतरी। इस मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को ग्राहक को पूरी रकम सात प्रतिशत ब्याज समेत लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि महंगी कार होने का अर्थ यह नहीं कि कंपनी अपनी जिम्मेदारियों से बच सकती है।
आयोग ने फ्यूल टैंक के ढक्कन में कमी और डीलर स्तर पर चेसिस से छेड़छाड़ को भी गंभीर खामी माना। कुमकुम रानी की अध्यक्षता और बीएस मनराल की सदस्यता वाली पीठ ने यह फैसला सुनाया। साथ ही कंपनी को वाद व्यय के रूप में 50 हजार रुपये देने के निर्देश भी दिए गए।
जानकारी के अनुसार, मैसर्स इप्रो ग्लोबल लिमिटेड ने 27 मार्च 2024 को 1.65 करोड़ रुपये में लैंड रोवर डिफेंडर खरीदी थी। कंपनी ने विज्ञापन में दावा किया था कि कार 6.1 सेकेंड में 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पकड़ सकती है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, परीक्षण के दौरान कार 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार पकड़ने में 7.1 सेकेंड से अधिक समय ले रही थी। इस पर कंपनी ने तर्क दिया कि घोषित रफ्तार विशेष परीक्षण परिस्थितियों में हासिल की जा सकती है। आयोग ने कहा कि यदि यह तथ्य खरीद के समय उपभोक्ता को नहीं बताया गया, तो यह भ्रामक जानकारी की श्रेणी में आता है।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कार का फ्यूल टैंक ढक्कन सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम से संचालित नहीं होता, जबकि यह सुविधा अपेक्षित थी। आयोग ने इसे निर्माण दोष माना।
इसके अलावा कार के निचले हिस्से से आवाज आने पर वाहन डीलर के पास ले जाया गया, जहां बिना अनुमति चेसिस में कटिंग और वेल्डिंग की गई। आयोग ने कहा कि चेसिस वाहन की रीढ़ होता है और उसमें छेड़छाड़ से वाहन की मूल गुणवत्ता प्रभावित होती है।
कंपनी ने दलील दी कि यह कार्य डीलर ने किया, इसलिए जिम्मेदारी उसकी है। आयोग ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट के लिए जगुआर लैंड रोवर इंडिया लिमिटेड को जिम्मेदार ठहराया।



