देहरादून। उत्तराखंड कैबिनेट की गुरुवार को हुई बैठक में 18 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिनमें से कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी दी।
कैबिनेट ने उत्तराखंड मोटरयान संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत प्रवर्तन अधिकारी अब वर्दी पहनेंगे। वहीं कुंभ मेले से जुड़े विकास कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया भी आसान कर दी गई है। अब एक करोड़ रुपये तक के कार्य मेला अधिकारी, पांच करोड़ रुपये तक के कार्य मंडलायुक्त और इससे अधिक राशि के कार्य शासन स्तर से स्वीकृत होंगे।
आबकारी और परिवहन विभाग के फैसले
आबकारी नीति में व्यय दर छह प्रतिशत निर्धारित किए जाने के अनुरूप वाणिज्य कर विभाग की नियमावली में संशोधन को मंजूरी मिली। परिवहन विभाग के तहत बस खरीद प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया। पहले 100 बसों की अनुमति थी, लेकिन जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत होने के बाद अब 109 बसें खरीदी जाएंगी।
वन विभाग में बड़े बदलाव
उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली-2016 में संशोधन को मंजूरी दी गई। वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई है, जबकि वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष कर दी गई है। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
मदरसों को मान्यता का नया प्रावधान
उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम-2025 पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है। अब कक्षा एक से आठ तक के 452 मदरसों को जिला स्तर से मान्यता मिलेगी, जबकि कक्षा नौ से 12 तक के करीब 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। इसके लिए जल्द अध्यादेश लाया जाएगा।
शिक्षा विभाग के फैसले
प्रतीक्षा सूची अब एक वर्ष तक ही वैध रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करने वाली नियमावली को मंजूरी दी गई है। सहायक अध्यापकों की सेवा नियमावली को भी स्वीकृति मिली।
लोनिवि और ठेकेदारों को राहत
लोक निर्माण विभाग में हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में जेई भर्ती मामलों की जानकारी कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई। वर्कचार्ज कर्मियों से जुड़े फैसले पर हाईकोर्ट के स्टे की भी जानकारी दी गई। डी श्रेणी के ठेकेदार अब एक करोड़ की जगह 1.5 करोड़ रुपये तक के कार्य ले सकेंगे।
उच्च शिक्षा और मधुमक्खी पालन नीति
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का लाभ अब 21 अशासकीय कॉलेजों तक बढ़ा दिया गया है। वन सीमा क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी दी गई है। इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ने और मानव-हाथी संघर्ष कम होने की उम्मीद जताई गई है। वन सीमा मौन पालन, मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष नियमावली-2026 को भी स्वीकृति दी गई।



