दुनिया भर की नजरें जिस भू-राजनीतिक संकट पर टिकी थीं, वहां से बड़ी कूटनीतिक राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे फिर से खोलने पर बनी सहमति ने वैश्विक तनाव को कम करने के साथ-साथ बुलियन बाजार में जबरदस्त तेजी ला दी है। युद्ध शुरू होने के बाद इसे सबसे ठोस राजनयिक घटनाक्रम माना जा रहा है।
इस समझौते की उम्मीदों के बीच तेल की कीमतों, बॉन्ड यील्ड और डॉलर में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ने से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। गुरुवार को कॉमेक्स बाजार में सोना 4,760 डॉलर प्रति औंस और चांदी 80 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई।
घरेलू बाजार में भी तेजी का असर साफ दिखा। 24 कैरेट सोना 470 रुपये यानी 0.31 प्रतिशत बढ़कर 1,53,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी 2,140 रुपये की तेजी के साथ 2,26,220 रुपये प्रति किलो रही। इससे पहले बुधवार को भी सोने में 3,224 रुपये की तेजी दर्ज की गई थी और इसकी कीमत 1,50,860 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी। चांदी भी 8,602 रुपये उछलकर 2,49,067 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंची।
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी रिटेल बिजनेस प्रमुख सुनील कटके ने कहा कि लगातार तीसरे सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। उनके अनुसार अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों ने मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंकाओं को कम किया है, जिससे तेल और बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई। डॉलर भी युद्ध-पूर्व स्तर के करीब लौट आया है, जिससे सोने को अतिरिक्त समर्थन मिला है।
उन्होंने कहा कि उम्मीद से कमजोर एडीपी पेरोल आंकड़ों ने अमेरिकी श्रम बाजार में नरमी के संकेत दिए हैं। यदि शुक्रवार को जारी होने वाली रोजगार रिपोर्ट भी कमजोरी की पुष्टि करती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इससे सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों को और मजबूती मिल सकती है। कटके के अनुसार निकट अवधि में सोने में करीब 3,000 रुपये तक की और तेजी संभव है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष और कमोडिटी विश्लेषक जतीन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर सकारात्मक माहौल के चलते सोने की कीमतों में करीब 850 रुपये की तेजी आई है। डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी से भी सोने को मजबूती मिली है। बाजार को उम्मीद है कि यदि दोनों पक्ष प्रस्तावित शर्तों पर सहमत होते हैं तो मौजूदा वार्ता दीर्घकालिक शांति समझौते का रूप ले सकती है।
जानकारों के मुताबिक अब बाजार की नजर अमेरिकी गैर-कृषि वेतन और बेरोजगारी आंकड़ों पर है, जो ब्याज दरों और सोने की अल्पकालिक दिशा तय करेंगे। तकनीकी स्तर पर सोना 1,51,000 रुपये के आसपास मजबूत समर्थन बनाए हुए है, जबकि 1,55,000 रुपये तत्काल प्रतिरोध माना जा रहा है।
कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च एवीपी कायनात चैनवाला ने कहा कि भू-राजनीतिक हालात और शांति समझौते की उम्मीदों ने सोने-चांदी को मजबूत समर्थन दिया है। तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंकाएं कम हुई हैं, जिसका सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिला है।
एमसीएक्स पर सोने के लिए 1,47,500 से 1,48,000 रुपये का स्तर मजबूत समर्थन माना जा रहा है, जबकि 1,56,000 रुपये के आसपास प्रतिरोध है। चांदी के लिए 2,25,000 से 2,32,000 रुपये का दायरा समर्थन और 2,85,000 रुपये का स्तर प्रतिरोध बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग में सुधार आने तक आने वाले सप्ताहों में सोना, चांदी की तुलना में अधिक मजबूत रह सकता है।
वर्ष 2026 में अब तक सोने की कीमतों में करीब 18,000 रुपये की तेजी दर्ज की गई है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना करीब 1.33 लाख रुपये था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया है। वहीं चांदी भी इस साल लगभग 19,000 रुपये महंगी हो चुकी है। वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन चांदी करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर 2.49 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।



